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mahabharat 12.111.38: मुझसे परामर्श लेकर यदि यह सिद्ध हो जाए कि तुम्हारे पूर्व मंत्री गलत थे, तो भी उन्हें प्राणदंड न दो। और क्रोध में आकर मेरे निकटस्थों पर आक्रमण न करो। ॥38॥   |   mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  12.111.38 
मया सम्मन्त्र्य पश्चाच्च न हिंस्या: सचिवास्त्वया।
मदीयानां च कुपितो मा त्वं दण्डं निपातये:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
मुझसे परामर्श लेकर यदि यह सिद्ध हो जाए कि तुम्हारे पूर्व मंत्री गलत थे, तो भी उन्हें प्राणदंड न दो। और क्रोध में आकर मेरे निकटस्थों पर आक्रमण न करो। ॥38॥
 
After taking advice from me, if it is proved that your previous ministers were wrong, then also do not give them death penalty. And in a fit of anger, do not attack my close ones. ॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)