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mahabharat 12.111.37: मैं एकान्त में तुमसे मिलकर तुम्हारे हित की बातें कहूँगा। तुम भी मुझसे अपने जाति-बंधुओं का कुशल-मंगल न पूछना ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  12.111.37 
एक एकेन संगम्य रहो ब्रूयां हितं वच:।
न च ते ज्ञातिकार्येषु प्रष्टव्योऽहं हिताहिते॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
मैं एकान्त में तुमसे मिलकर तुम्हारे हित की बातें कहूँगा। तुम भी मुझसे अपने जाति-बंधुओं का कुशल-मंगल न पूछना ॥37॥
 
I will meet you alone in solitude and tell you things that are beneficial to you. You too should not ask me about the welfare of your caste brothers. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)