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एक एकेन संगम्य रहो ब्रूयां हितं वच:।
न च ते ज्ञातिकार्येषु प्रष्टव्योऽहं हिताहिते॥ ३७॥
अनुवाद
मैं एकान्त में तुमसे मिलकर तुम्हारे हित की बातें कहूँगा। तुम भी मुझसे अपने जाति-बंधुओं का कुशल-मंगल न पूछना ॥37॥
I will meet you alone in solitude and tell you things that are beneficial to you. You too should not ask me about the welfare of your caste brothers. ॥ 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥