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mahabharat 12.111.3: प्राचीन काल की कथा है, धन-धान्य से भरपूर पुरिका नामक नगर में पौरिका नाम का एक राजा राज्य करता था। वह बड़ा ही क्रूर और दुष्ट था। उसका मन केवल प्राणियों की हत्या करने में ही लगा रहता था।   |   mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.111.3 
पुरिकायां पुरि पुरा श्रीमत्यां पौरिको नृप:।
परहिंसारति: क्रूरो बभूव पुरुषाधम:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
प्राचीन काल की कथा है, धन-धान्य से भरपूर पुरिका नामक नगर में पौरिका नाम का एक राजा राज्य करता था। वह बड़ा ही क्रूर और दुष्ट था। उसका मन केवल प्राणियों की हत्या करने में ही लगा रहता था।
 
It is a story of ancient times, a king named Paurika ruled in a city named Purika which was rich in wealth and grains. He was very cruel and wicked. His heart was only in killing other creatures.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)