Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.111.29: मैं यहाँ अपने आप से संतुष्ट हूँ। मैंने एक ऐसा पेशा अपनाया है जो बहुत कष्टदायक है। मैं राज-सेवा के कर्तव्यों से अनभिज्ञ हूँ और जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण करता हूँ। | mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं यहाँ अपने आप से संतुष्ट हूँ। मैंने एक ऐसा पेशा अपनाया है जो बहुत कष्टदायक है। मैं राज-सेवा के कर्तव्यों से अनभिज्ञ हूँ और जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण करता हूँ।
Here I am content with myself. I have adopted a profession which is very painful. I am ignorant of the duties of king's service and roam freely in the forest.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥