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mahabharat 12.111.26: मेरा अच्छा स्वभाव आपके पुराने सेवकों से मेल नहीं खाएगा। वे दुष्ट स्वभाव के प्राणी हैं। इसलिए वे मेरे पक्ष में आपके कानों में फुसफुसाते रहेंगे॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.111.26 
न योक्ष्यति हि मे शीलं तव भृत्यै: पुरातनै:।
ते त्वां विभेदयिष्यन्ति दु:शीलाश्च मदन्तरे॥ २६॥
 
 
अनुवाद
मेरा अच्छा स्वभाव आपके पुराने सेवकों से मेल नहीं खाएगा। वे दुष्ट स्वभाव के प्राणी हैं। इसलिए वे मेरे पक्ष में आपके कानों में फुसफुसाते रहेंगे॥ 26॥
 
My good nature will not match with your old servants. They are creatures of evil nature. Therefore, they will keep on whispering in your ears on my behalf.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)