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mahabharat 12.111.22: वीर! बिना मंत्री के राजा अकेले बड़े राज्य पर शासन नहीं कर सकता। यदि शरीर को सुखाने वाला दुष्ट मंत्री मिल जाए, तो वह भी शासन नहीं कर सकता॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.111.22 
न शक्यं ह्यनमात्येन महत्त्वमनुशासितुम्।
दुष्टामात्येन वा वीर शरीरपरिपन्थिना॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वीर! बिना मंत्री के राजा अकेले बड़े राज्य पर शासन नहीं कर सकता। यदि शरीर को सुखाने वाला दुष्ट मंत्री मिल जाए, तो वह भी शासन नहीं कर सकता॥ 22॥
 
Brave! A king alone cannot rule a large kingdom without a minister. If a wicked minister who dries up the body is found, then even he cannot rule.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)