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mahabharat 12.111.19: परन्तु मैं तुम्हें एक बात बता दूँ कि संसार में यह बात सर्वविदित है कि हमारी जाति स्वभाव से कठोर है; अतः यदि तुम नम्रता से व्यवहार करोगे और मेरे हित में लगे रहोगे, तो अवश्य ही तुम्हारा कल्याण होगा॥19॥   |   mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.111.19 
तीक्ष्णा इति वयं ख्याता भवन्तं ज्ञापयामहे।
मृदुपूर्वं हितं चैव श्रेयश्चाधिगमिष्यसि॥ १९॥
 
 
अनुवाद
परन्तु मैं तुम्हें एक बात बता दूँ कि संसार में यह बात सर्वविदित है कि हमारी जाति स्वभाव से कठोर है; अतः यदि तुम नम्रता से व्यवहार करोगे और मेरे हित में लगे रहोगे, तो अवश्य ही तुम्हारा कल्याण होगा॥19॥
 
But I will inform you of one thing. It is well known throughout the world that our race is harsh by nature; therefore, if you behave gently and remain engaged in my welfare, you will certainly attain welfare.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)