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mahabharat 12.111.17: जब सियार के धर्माचरण और विचारों की चर्चा दूर-दूर तक फैली, तब एक विख्यात और वीर बाघ उसे विद्वान् और शुद्ध स्वभाव वाला जानकर उसके पास आया, अपनी इच्छानुसार उसका पूजन किया और उसे अपना मंत्री बना लिया॥ 17॥   |   mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.111.17 
तं शुचिं पण्डितं मत्वा शार्दूल: ख्यातविक्रम:।
कृत्वाऽऽत्मसदृशीं पूजां साचिव्येऽवरयत् स्वयम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जब सियार के धर्माचरण और विचारों की चर्चा दूर-दूर तक फैली, तब एक विख्यात और वीर बाघ उसे विद्वान् और शुद्ध स्वभाव वाला जानकर उसके पास आया, अपनी इच्छानुसार उसका पूजन किया और उसे अपना मंत्री बना लिया॥ 17॥
 
When the news of the jackal's pious conduct and thoughts spread far and wide, a renowned and brave tiger considered him to be a learned person and of a pure nature and came near him, worshipped him in the same manner as he liked and chose him to be his minister.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)