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mahabharat 12.111.11: उसके वचन सुनकर सियार एकाग्रचित्त होकर मधुर, विस्तृत, तर्कपूर्ण और कोमल वचनों में इस प्रकार बोला -॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.111.11 
इति तेषां वच: श्रुत्वा प्रत्युवाच समाहित:।
मधुरै: प्रसृतैर्वाक्यैर्हेतुमद्भिरनिष्ठुरै:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उसके वचन सुनकर सियार एकाग्रचित्त होकर मधुर, विस्तृत, तर्कपूर्ण और कोमल वचनों में इस प्रकार बोला -॥11॥
 
On hearing his words, the jackal became concentrated and spoke in sweet, detailed, logical and soft words as follows -॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)