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mahabharat 12.110.5: जो लोग प्रतिदिन अपने घर में अतिथियों का स्वागत करते हैं, कभी किसी में दोष नहीं देखते तथा नियमित रूप से वेदों आदि पवित्र शास्त्रों का अध्ययन करते हैं, वे कठिन से कठिन कठिनाइयों पर विजय प्राप्त करते हैं ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.110: सदाचार और ईश्वरभक्ति आदिको दु:खोंसे छूटनेका उपाय बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 110: सदाचार और ईश्वरभक्ति आदिको दु:खोंसे छूटनेका उपाय बताना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.110.5 
वासयन्त्यतिथीन् नित्यं नित्यं ये चानसूयका:।
नित्यं स्वाध्यायशीलाश्च दुर्गाण्यतितरन्ति ते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जो लोग प्रतिदिन अपने घर में अतिथियों का स्वागत करते हैं, कभी किसी में दोष नहीं देखते तथा नियमित रूप से वेदों आदि पवित्र शास्त्रों का अध्ययन करते हैं, वे कठिन से कठिन कठिनाइयों पर विजय प्राप्त करते हैं ॥5॥
 
Those who welcome guests in their homes every day, never find faults in anyone, and regularly study the Vedas and other sacred scriptures, overcome difficult difficulties. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)