Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.110.16: जो किसी से नहीं डरते, जो स्वयं किसी से नहीं डरते और जिनकी दृष्टि में यह सम्पूर्ण जगत् अपनी आत्मा के समान है, वे कठिन से कठिन कठिनाइयों को पार कर जाते हैं ॥16॥ | mahabharat अध्याय 12.110: सदाचार और ईश्वरभक्ति आदिको दु:खोंसे छूटनेका उपाय बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
येषां न कश्चित् त्रसति न त्रसन्ति हि कस्यचित्।
येषामात्मसमो लोको दुर्गाण्यतितरन्ति ते॥ १६॥
अनुवाद
जो किसी से नहीं डरते, जो स्वयं किसी से नहीं डरते और जिनकी दृष्टि में यह सम्पूर्ण जगत् अपनी आत्मा के समान है, वे कठिन से कठिन कठिनाइयों को पार कर जाते हैं ॥16॥
Those who are not afraid of anyone, who themselves are not afraid of anyone and in whose eyes this entire world is like their own soul, they overcome difficult difficulties. ॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥