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mahabharat 12.110.14: जो मनुष्य तपस्या करते हैं, कौमार्य अवस्था से ही ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं तथा वेदों के अध्ययन-अध्ययन से संबंधित व्रत को पूरा करते हैं और स्नातक की उपाधि प्राप्त कर चुके हैं, वे सभी दुःखों से पार हो जाते हैं ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.110: सदाचार और ईश्वरभक्ति आदिको दु:खोंसे छूटनेका उपाय बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 110: सदाचार और ईश्वरभक्ति आदिको दु:खोंसे छूटनेका उपाय बताना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.110.14 
ये तपश्च तपस्यन्ति कौमारब्रह्मचारिण:।
विद्यावेदव्रतस्नाता दुर्गाण्यतितरन्ति ते॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य तपस्या करते हैं, कौमार्य अवस्था से ही ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं तथा वेदों के अध्ययन-अध्ययन से संबंधित व्रत को पूरा करते हैं और स्नातक की उपाधि प्राप्त कर चुके हैं, वे सभी दुःखों से पार हो जाते हैं ॥14॥
 
Those who do penance, remain committed to the practice of celibacy right from the age of virginity and complete the vow related to learning and study of Vedas and have completed their graduation, they overcome all the sorrows. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)