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mahabharat 12.11.3: यद्यपि वे सभी बहुत धनवान थे, फिर भी वे अपने भाइयों और माता-पिता को छोड़कर वन में आ गए और ब्रह्मचर्य का पालन करना अपना धर्म मानकर उसका पालन करने लगे। एक दिन भगवान इंद्र ने उन्हें आशीर्वाद दिया।   |   mahabharat अध्याय 12.11: अर्जुनका पक्षिरूपधारी इन्द्र और ऋषिबालकोंके संवादका उल्लेखपूर्वक गृहस्थ-धर्मके पालनपर जोर देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.11.3 
धर्मोऽयमिति मन्वाना: समृद्धा ब्रह्मचारिण:।
त्यक्त्वा भ्रातॄन् पितॄंश्चैव तानिन्द्रोऽन्वकृपायत॥ ३॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि वे सभी बहुत धनवान थे, फिर भी वे अपने भाइयों और माता-पिता को छोड़कर वन में आ गए और ब्रह्मचर्य का पालन करना अपना धर्म मानकर उसका पालन करने लगे। एक दिन भगवान इंद्र ने उन्हें आशीर्वाद दिया।
 
Though all of them were very rich, they left their brothers and parents and came to the forest and started practicing celibacy, considering this as their religion. One day, Lord Indra blessed them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)