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mahabharat 12.11.28: हे सर्वज्ञ मनुष्य! अतः तुम भी सदा धैर्य धारण करो और शत्रुओं से रहित इस सम्पूर्ण पृथ्वी का शासन करो॥28॥   |   mahabharat अध्याय 12.11: अर्जुनका पक्षिरूपधारी इन्द्र और ऋषिबालकोंके संवादका उल्लेखपूर्वक गृहस्थ-धर्मके पालनपर जोर देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 11: अर्जुनका पक्षिरूपधारी इन्द्र और ऋषिबालकोंके संवादका उल्लेखपूर्वक गृहस्थ-धर्मके पालनपर जोर देना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.11.28 
तस्मात्त्वमपि सर्वज्ञ धैर्यमालम्ब्य शाश्वतम्।
प्रशाधि पृथिवीं कृत्स्नां हतामित्रां नरोत्तम॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे सर्वज्ञ मनुष्य! अतः तुम भी सदा धैर्य धारण करो और शत्रुओं से रहित इस सम्पूर्ण पृथ्वी का शासन करो॥28॥
 
The omniscient human being! Therefore, you too should be patient forever and rule this entire earth which is free from enemies. 28॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि अर्जुनवाक्ये ऋषिशकुनिसंवादकथने एकादशोऽध्याय:॥ ११॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें अर्जुनके वचनके प्रसंगमें ऋषियों और पक्षिरूपधारी इन्द्रके संवादका वर्णनविषयक ग्यारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)