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mahabharat 12.11.26: जो पुण्यात्मा इस कठिन व्रत का पालन ईर्ष्यारहित होकर करते हैं, वे इन्द्र के स्वर्ग को प्राप्त होते हैं और वहाँ अनंत वर्षों तक निवास करते हैं॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 12.11: अर्जुनका पक्षिरूपधारी इन्द्र और ऋषिबालकोंके संवादका उल्लेखपूर्वक गृहस्थ-धर्मके पालनपर जोर देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.11.26 
त्रिदिवं प्राप्य शक्रस्य स्वर्गलोके विमत्सरा:।
वसन्ति शाश्वतान् वर्षाञ्जना दुष्करकारिण:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
जो पुण्यात्मा इस कठिन व्रत का पालन ईर्ष्यारहित होकर करते हैं, वे इन्द्र के स्वर्ग को प्राप्त होते हैं और वहाँ अनंत वर्षों तक निवास करते हैं॥ 26॥
 
Those virtuous souls who follow this difficult vow without jealousy, reach the heaven of Indra and reside there for endless years.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)