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mahabharat 12.11.20: इस कठिन व्रत को करने से देवताओं ने महान यश प्राप्त किया है। गृहस्थ धर्म का यह पालन स्वयं एक कठिन व्रत है। मैं आप सभी से इस कठिन व्रत का भार उठाने के लिए कह रहा हूँ ॥20॥   |   mahabharat अध्याय 12.11: अर्जुनका पक्षिरूपधारी इन्द्र और ऋषिबालकोंके संवादका उल्लेखपूर्वक गृहस्थ-धर्मके पालनपर जोर देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 11: अर्जुनका पक्षिरूपधारी इन्द्र और ऋषिबालकोंके संवादका उल्लेखपूर्वक गृहस्थ-धर्मके पालनपर जोर देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.11.20 
देवा वै दुष्करं कृत्वा विभूतिं परमां गता:।
तस्माद् गार्हस्थ्यमुद्वोढुं दुष्करं प्रब्रवीमि व:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
इस कठिन व्रत को करने से देवताओं ने महान यश प्राप्त किया है। गृहस्थ धर्म का यह पालन स्वयं एक कठिन व्रत है। मैं आप सभी से इस कठिन व्रत का भार उठाने के लिए कह रहा हूँ ॥20॥
 
By performing this difficult fast, the gods have attained great glory. This observance of the householder's religion is itself a difficult fast. I am asking you all to bear the burden of this difficult fast. ॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)