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mahabharat 12.11.12: ब्राह्मणों के लिए मंत्रों सहित जातकर्म आदि कर्मकाण्डों का प्रावधान है। जब तक वह जीवित है, समय-समय पर उसके आवश्यक कर्मकाण्ड करते रहना चाहिए। मृत्यु के पश्चात भी यथासमय श्मशान में अंतिम संस्कार करना चाहिए तथा घर पर ही वैदिक रीति से श्राद्ध आदि कर्म करना चाहिए।॥12॥   |   mahabharat अध्याय 12.11: अर्जुनका पक्षिरूपधारी इन्द्र और ऋषिबालकोंके संवादका उल्लेखपूर्वक गृहस्थ-धर्मके पालनपर जोर देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.11.12 
मन्त्रोऽयं जातकर्मादिर्ब्राह्मणस्य विधीयते।
जीवतोऽपि यथाकालं श्मशाननिधनादिभि:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणों के लिए मंत्रों सहित जातकर्म आदि कर्मकाण्डों का प्रावधान है। जब तक वह जीवित है, समय-समय पर उसके आवश्यक कर्मकाण्ड करते रहना चाहिए। मृत्यु के पश्चात भी यथासमय श्मशान में अंतिम संस्कार करना चाहिए तथा घर पर ही वैदिक रीति से श्राद्ध आदि कर्म करना चाहिए।॥12॥
 
For Brahmins, there is a provision of rituals like Jaatkarma etc. with mantras. As long as he is alive, his necessary rituals should be performed from time to time. Even after his death, the last rites should be performed in the cremation ground in due time and Shraddha etc. should be performed at home according to Vedic rituals.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)