Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.108.9-10h: भरतनंदन! अतः तुम इन तीनों के प्रति, जो तीनों लोकों के स्वरूप हैं, अच्छा व्यवहार करो। तुम्हारा कल्याण हो। ऐसा करने से तुम्हें यश और महान फल देने वाला धर्म प्राप्त होगा। 9 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.108: माता-पिता तथा गुरुकी सेवाका महत्त्व   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 108: माता-पिता तथा गुरुकी सेवाका महत्त्व  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  12.108.9-10h 
सम्यगेतेषु वर्तस्व त्रिषु लोकेषु भारत॥ ९॥
यश: प्राप्स्यसि भद्रं ते धर्मं च सुमहत्फलम्।
 
 
अनुवाद
भरतनंदन! अतः तुम इन तीनों के प्रति, जो तीनों लोकों के स्वरूप हैं, अच्छा व्यवहार करो। तुम्हारा कल्याण हो। ऐसा करने से तुम्हें यश और महान फल देने वाला धर्म प्राप्त होगा। 9 1/2॥
 
Bharatnandan! Therefore, you should behave well towards these three, who are the embodiment of the three worlds. May you be well. By doing this you will attain fame and a religion that gives great results. 9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)