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mahabharat 12.108.8-9h: यदि तुम इन तीनों की सेवा में कोई त्रुटि नहीं करोगे, तो तीनों लोकों पर विजय प्राप्त कर लोगे। पिता की सेवा करने से तुम इस लोक से पार हो जाओगे, माता की सेवा करने से तुम परलोक से पार हो जाओगे और गुरु की नियमित सेवा करने से तुम ब्रह्मलोक से भी पार हो जाओगे। 8 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.108: माता-पिता तथा गुरुकी सेवाका महत्त्व   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 108: माता-पिता तथा गुरुकी सेवाका महत्त्व  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  12.108.8-9h 
त्रिष्वप्रमाद्यन्नेतेषु त्रींल्लोकांश्च विजेष्यसि।
पितृवृत्त्या त्विमं लोकं मातृवृत्त्या तथा परम्॥ ८॥
ब्रह्मलोकं गुरोर्वृत्त्या नियमेन तरिष्यसि।
 
 
अनुवाद
यदि तुम इन तीनों की सेवा में कोई त्रुटि नहीं करोगे, तो तीनों लोकों पर विजय प्राप्त कर लोगे। पिता की सेवा करने से तुम इस लोक से पार हो जाओगे, माता की सेवा करने से तुम परलोक से पार हो जाओगे और गुरु की नियमित सेवा करने से तुम ब्रह्मलोक से भी पार हो जाओगे। 8 1/2॥
 
If you do not commit any mistake in the service of these three, you will conquer all three worlds. By serving your father, you will cross this world, by serving your mother, you will cross the next world and by serving your Guru regularly, you will cross even the Brahmalok. 8 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)