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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 108: माता-पिता तथा गुरुकी सेवाका महत्त्व
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श्लोक 6
श्लोक
12.108.6
एत एव त्रयो लोका एत एवाश्रमास्त्रय:।
एत एव त्रयो वेदा एत एव त्रयोऽग्नय:॥ ६॥
अनुवाद
ये माता-पिता और गुरु ही तीन लोक हैं, ये तीन आश्रम हैं, ये तीन वेद हैं और ये तीन अग्नियाँ हैं ॥6॥
These parents and teachers are the three worlds, these are the three ashrams, these are the three Vedas and these are the three fires. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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