श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 108: माता-पिता तथा गुरुकी सेवाका महत्त्व  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.108.4 
यच्च तेऽभ्यनुजानीयु: कर्म तात सुपूजिता:।
धर्माधर्मविरुद्धं वा तत् कर्तव्यं युधिष्ठिर॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे युधिष्ठिर! पूज्य माता-पिता और बड़ों द्वारा जो भी आदेश दिया जाए, चाहे वह धर्म के अनुकूल हो या विरुद्ध, उसका पालन अवश्य करना चाहिए।॥4॥
 
O dear Yudhishthira, whatever order is given by the well-respected parents and elders, whether it is in accordance with Dharma or against it, it must be followed. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)