Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.108.31: यदि कोई व्यक्ति जो अपने माता-पिता का वैध पुत्र है और उनके द्वारा पाला गया है, अपने माता-पिता का भरण-पोषण नहीं करता, तो वह भ्रूण-हत्या से भी अधिक पाप करता है और उससे बढ़कर पापी संसार में कोई दूसरा नहीं है ॥31॥ | mahabharat अध्याय 12.108: माता-पिता तथा गुरुकी सेवाका महत्त्व । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भृतो वृद्धो यो न बिभर्ति पुत्र:
स्वयोनिज: पितरं मातरं च।
तद् वै पापं भ्रूणहत्याविशिष्टं
तस्मान्नान्य: पापकृदस्ति लोके॥ ३१॥
अनुवाद
यदि कोई व्यक्ति जो अपने माता-पिता का वैध पुत्र है और उनके द्वारा पाला गया है, अपने माता-पिता का भरण-पोषण नहीं करता, तो वह भ्रूण-हत्या से भी अधिक पाप करता है और उससे बढ़कर पापी संसार में कोई दूसरा नहीं है ॥31॥
If a person who is the legitimate son of his parents and has been brought up by them does not support his parents, then he commits a sin worse than killing an embryo and there is no other person in the world more sinful than him. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥