भृतो वृद्धो यो न बिभर्ति पुत्र:
स्वयोनिज: पितरं मातरं च।
तद् वै पापं भ्रूणहत्याविशिष्टं
तस्मान्नान्य: पापकृदस्ति लोके॥ ३१॥
अनुवाद
यदि कोई व्यक्ति जो अपने माता-पिता का वैध पुत्र है और उनके द्वारा पाला गया है, अपने माता-पिता का भरण-पोषण नहीं करता, तो वह भ्रूण-हत्या से भी अधिक पाप करता है और उससे बढ़कर पापी संसार में कोई दूसरा नहीं है ॥31॥
If a person who is the legitimate son of his parents and has been brought up by them does not support his parents, then he commits a sin worse than killing an embryo and there is no other person in the world more sinful than him. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)