Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.108.3: भीष्मजी बोले - राजन! मुझे तो माता-पिता और गुरुजनों का पूजन अधिक महत्त्वपूर्ण प्रतीत होता है। इस लोक में इस पुण्य कर्म में प्रवृत्त होकर मनुष्य महान यश और उत्तम लोक को प्राप्त करता है। 3॥ | mahabharat अध्याय 12.108: माता-पिता तथा गुरुकी सेवाका महत्त्व । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्म उवाच
मातापित्रोर्गुरूणां च पूजा बहुमता मम।
इह युक्तो नरो लोकान् यशश्च महदश्नुते॥ ३॥
अनुवाद
भीष्मजी बोले - राजन! मुझे तो माता-पिता और गुरुजनों का पूजन अधिक महत्त्वपूर्ण प्रतीत होता है। इस लोक में इस पुण्य कर्म में प्रवृत्त होकर मनुष्य महान यश और उत्तम लोक को प्राप्त करता है। 3॥
Bhishmaji said – King! To me, worship of parents and teachers seems to be more important. By engaging in this virtuous work in this world, man attains great fame and the best world. 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥