Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.108.18-19h: लेकिन मेरा मानना ​​है कि गुरु का स्थान पिता या माता से भी बड़ा है; क्योंकि माता-पिता केवल इस शरीर को जन्म देने में ही उपयोगी होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.108: माता-पिता तथा गुरुकी सेवाका महत्त्व   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 108: माता-पिता तथा गुरुकी सेवाका महत्त्व  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  12.108.18-19h 
गुरुर्गरीयान् पितृतो मातृतश्चेति मे मति:॥ १८॥
उभौ हि मातापितरौ जन्मन्येवोपयुज्यत:।
 
 
अनुवाद
लेकिन मेरा मानना ​​है कि गुरु का स्थान पिता या माता से भी बड़ा है; क्योंकि माता-पिता केवल इस शरीर को जन्म देने में ही उपयोगी होते हैं।
 
But I believe that the position of a Guru is even greater than that of a father or mother; because parents are useful only in giving birth to this body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)