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गुरुर्गरीयान् पितृतो मातृतश्चेति मे मति:॥ १८॥
उभौ हि मातापितरौ जन्मन्येवोपयुज्यत:।
अनुवाद
लेकिन मेरा मानना है कि गुरु का स्थान पिता या माता से भी बड़ा है; क्योंकि माता-पिता केवल इस शरीर को जन्म देने में ही उपयोगी होते हैं।
But I believe that the position of a Guru is even greater than that of a father or mother; because parents are useful only in giving birth to this body.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥