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mahabharat 12.108.15-16h: मैं अपने सभी पुण्य कर्म इन तीनों गुरुओं को समर्पित करता था। इस कारण मेरे सभी पुण्यों का पुण्य सौ गुना और हज़ार गुना बढ़ गया है। युधिष्ठिर! इसी कारण तीनों लोक मेरे सामने प्रकट हो रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.108: माता-पिता तथा गुरुकी सेवाका महत्त्व   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 108: माता-पिता तथा गुरुकी सेवाका महत्त्व  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  12.108.15-16h 
तेभ्य एव हि यत् सर्वं कृत्वा च विसृजाम्यहम्।
तदासीन्मे शतगुणं सहस्रगुणमेव च॥ १५॥
तस्मान्मे सम्प्रकाशन्ते त्रयो लोका युधिष्ठिर।
 
 
अनुवाद
मैं अपने सभी पुण्य कर्म इन तीनों गुरुओं को समर्पित करता था। इस कारण मेरे सभी पुण्यों का पुण्य सौ गुना और हज़ार गुना बढ़ गया है। युधिष्ठिर! इसी कारण तीनों लोक मेरे सामने प्रकट हो रहे हैं।
 
I used to dedicate all my good deeds to these three Gurus. Due to this, the merits of all my good deeds have increased hundredfold and thousandfold. Yudhishthir! Because of this, the three worlds are appearing in front of my sight. 15 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)