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mahabharat 12.107.9: परंतप राजन! मैं ये सब बातें पूरी सुनना चाहता हूँ। कृपया मुझे बताइए कि वे समूह या दल आपस में किस प्रकार विभाजित नहीं होते॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.107: गणतन्त्र राज्यका वर्णन और उसकी नीति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 107: गणतन्त्र राज्यका वर्णन और उसकी नीति  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.107.9 
एतदिच्छाम्यहं श्रोतुं निखिलेन परंतप।
यथा च ते न भिद्येरंस्तच्च मे वद पार्थिव॥ ९॥
 
 
अनुवाद
परंतप राजन! मैं ये सब बातें पूरी सुनना चाहता हूँ। कृपया मुझे बताइए कि वे समूह या दल आपस में किस प्रकार विभाजित नहीं होते॥9॥
 
'Parantapa Rajan! I want to hear all these things in full. Please tell me how those groups or groups do not split among themselves.॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)