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mahabharat 12.107.6: हे बुद्धिमानों में श्रेष्ठ पितामह! आपने विजय की इच्छा रखने वाले राजा के आचरण का भी वर्णन किया है। अब मैं गणों (गणराज्यों) के आचरण और वृत्तांत को सुनना चाहता हूँ।॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.107: गणतन्त्र राज्यका वर्णन और उसकी नीति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 107: गणतन्त्र राज्यका वर्णन और उसकी नीति  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.107.6 
विजिगीषोस्तथा वृत्तमुक्तं चैव तथैव ते।
गणानां वृत्तिमिच्छामि श्रोतुं मतिमतां वर॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे बुद्धिमानों में श्रेष्ठ पितामह! आपने विजय की इच्छा रखने वाले राजा के आचरण का भी वर्णन किया है। अब मैं गणों (गणराज्यों) के आचरण और वृत्तांत को सुनना चाहता हूँ।॥6॥
 
O great grandfather among the wisest of all! You have also described the behaviour of a king who aspires for victory. Now I wish to hear the behaviour and story of the Ganas (republican states).॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)