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mahabharat 12.107.29-30h: जब संघ के सदस्य अचानक क्रोध या आसक्ति के कारण या स्वाभाविक लोभ के कारण भी एक-दूसरे से बातचीत करना बंद कर देते हैं, तो यह उनकी पराजय का संकेत है ॥29 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.107: गणतन्त्र राज्यका वर्णन और उसकी नीति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 107: गणतन्त्र राज्यका वर्णन और उसकी नीति  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  12.107.29-30h 
अकस्मात् क्रोधमोहाभ्यां लोभाद्‍वापि स्वभावजात्॥ २९॥
अन्योन्यं नाभिभाषन्ते तत्पराभवलक्षणम्।
 
 
अनुवाद
जब संघ के सदस्य अचानक क्रोध या आसक्ति के कारण या स्वाभाविक लोभ के कारण भी एक-दूसरे से बातचीत करना बंद कर देते हैं, तो यह उनकी पराजय का संकेत है ॥29 1/2॥
 
When members of the Sangha stop talking to each other due to sudden anger or attachment or even due to natural greed, it is a sign of their defeat. ॥29 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)