Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.107.28-29h: आंतरिक भय को दूर करके संघ की रक्षा करनी चाहिए। यदि संघ में एकता बनी रहे, तो बाह्य भय उसके लिए व्यर्थ है (वह उसे किसी भी प्रकार से हानि नहीं पहुँचा सकता)। हे राजन! आंतरिक भय संघ की जड़ों को तुरंत काट देता है। 28 1/2। | mahabharat अध्याय 12.107: गणतन्त्र राज्यका वर्णन और उसकी नीति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आंतरिक भय को दूर करके संघ की रक्षा करनी चाहिए। यदि संघ में एकता बनी रहे, तो बाह्य भय उसके लिए व्यर्थ है (वह उसे किसी भी प्रकार से हानि नहीं पहुँचा सकता)। हे राजन! आंतरिक भय संघ की जड़ों को तुरंत काट देता है। 28 1/2।
The union should be protected by removing the internal fear. If unity is maintained in the union, then external fear is useless for it (it cannot harm it in any way). O King! Internal fear immediately cuts off the roots of the union. 28 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥