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mahabharat 12.107.15: जो लोग सामूहिक शक्ति और पुरुषार्थ से संपन्न होते हैं, उन्हें सभी प्रकार की इच्छित वस्तुएँ सहज ही प्राप्त हो जाती हैं। समूह के बाहर के लोग भी समूह में रहने वालों से मित्रता स्थापित कर लेते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.107: गणतन्त्र राज्यका वर्णन और उसकी नीति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 107: गणतन्त्र राज्यका वर्णन और उसकी नीति  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.107.15 
अर्थाश्चैवाधिगम्यन्ते संघातबलपौरुषै:।
बाह्याश्च मैत्रीं कुर्वन्ति तेषु संघातवृत्तिषु॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जो लोग सामूहिक शक्ति और पुरुषार्थ से संपन्न होते हैं, उन्हें सभी प्रकार की इच्छित वस्तुएँ सहज ही प्राप्त हो जाती हैं। समूह के बाहर के लोग भी समूह में रहने वालों से मित्रता स्थापित कर लेते हैं।
 
Those who are blessed with collective strength and effort, easily obtain all kinds of desired things. People outside the group also establish friendship with those who live in groups.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)