Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.107.1-5: युधिष्ठिर बोले, "किन्तु हे भरतपुत्र! आपने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्रों के धर्मपूर्वक आचरण, उनके धन, जीविका के साधन और धर्म के फल का वर्णन किया है। राजाओं का धन, कोष, कोष संग्रह, शत्रुओं पर विजय, मंत्रियों के गुण और आचरण, प्रजा की उन्नति, संधि और युद्ध आदि छः गुणों का प्रयोग, सेना का आचरण, दुष्टों की पहचान, सज्जनों के लक्षण, जो आपके समान हैं, जो आपसे हीन हैं और जो आपसे श्रेष्ठ हैं - उन सभी लोगों के वास्तविक लक्षण, मध्यम वर्ग को संतुष्ट रखने के लिए प्रगतिशील राजा को किस प्रकार जीवनयापन करना चाहिए, दुर्बल व्यक्ति को गोद लेने और उसके लिए जीविका की व्यवस्था करने की आवश्यकता - इन सब विषयों को आपने धर्मानुसार, देश की रीति-नीति के अनुसार और शास्त्रों के अनुसार संक्षेप में प्रस्तुत किया है। 1-5। | mahabharat अध्याय 12.107: गणतन्त्र राज्यका वर्णन और उसकी नीति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
ब्राह्मणक्षत्रियविशां शूद्राणां च परंतप।
धर्मवृत्तं च वित्तं च वृत्त्युपाया: फलानि च॥ १॥
राज्ञां वित्तं च कोशं च कोशसंचयनं जय:।
अमात्यगुणवृत्तिश्च प्रकृतीनां च वर्धनम्॥ २॥
षाड्गुण्यगुणकल्पश्च सेनावृत्तिस्तथैव च।
परिज्ञानं च दुष्टस्य लक्षणं च सतामपि॥ ३॥
समहीनाधिकानां च यथावल्लक्षणं च यत्।
मध्यमस्य च तुष्टॺर्थं यथा स्थेयं विवर्धता॥ ४॥
क्षीणग्रहणवृत्तिश्च यथाधर्मं प्रकीर्तितम्।
लघुना देशरूपेण ग्रन्थयोगेन भारत॥ ५॥
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "किन्तु हे भरतपुत्र! आपने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्रों के धर्मपूर्वक आचरण, उनके धन, जीविका के साधन और धर्म के फल का वर्णन किया है। राजाओं का धन, कोष, कोष संग्रह, शत्रुओं पर विजय, मंत्रियों के गुण और आचरण, प्रजा की उन्नति, संधि और युद्ध आदि छः गुणों का प्रयोग, सेना का आचरण, दुष्टों की पहचान, सज्जनों के लक्षण, जो आपके समान हैं, जो आपसे हीन हैं और जो आपसे श्रेष्ठ हैं - उन सभी लोगों के वास्तविक लक्षण, मध्यम वर्ग को संतुष्ट रखने के लिए प्रगतिशील राजा को किस प्रकार जीवनयापन करना चाहिए, दुर्बल व्यक्ति को गोद लेने और उसके लिए जीविका की व्यवस्था करने की आवश्यकता - इन सब विषयों को आपने धर्मानुसार, देश की रीति-नीति के अनुसार और शास्त्रों के अनुसार संक्षेप में प्रस्तुत किया है। 1-5।
Yudhishthira said, "But, O son of Bharat, you have explained the religious conduct of Brahmins, Kshatriyas, Vaishyas and Shudras, their wealth, means of livelihood and the fruits of religion. Wealth of kings, treasury, collection of treasury, victory over enemies, qualities and behaviour of ministers, progress of subjects, use of six qualities like treaty and war, behaviour of the army, identification of wicked people, characteristics of good men, those who are equal to you, inferior to you and superior to you - the true characteristics of all those people, instructions on how a progressive king should live to keep the middle class satisfied, the need to adopt a weak person and arrange livelihood for him - you have briefly presented all these subjects in accordance with religion, according to the customs of the country and the scriptures. 1-5.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥