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mahabharat 12.106.8: पिताश्री! जब सत्यवादी विदेहराज जनक मेरे आश्रम में आएंगे, तब मैं जो भी आज्ञा दूँगा, वे निःसंदेह उसका पालन करेंगे।॥8॥   |   mahabharat अध्याय 12.106: कालकवृक्षीय मुनिका विदेहराज तथा कोसलराजकुमारमें मेल कराना और विदेहराजका कोसलराजको अपना जामाता बना लेना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 106: कालकवृक्षीय मुनिका विदेहराज तथा कोसलराजकुमारमें मेल कराना और विदेहराजका कोसलराजको अपना जामाता बना लेना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.106.8 
आगन्ता मद्‍गृहं तात वैदेह: सत्यसंगर:।
अथाहं तं नियोक्ष्यामि तत् करिष्यत्यसंशयम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
पिताश्री! जब सत्यवादी विदेहराज जनक मेरे आश्रम में आएंगे, तब मैं जो भी आज्ञा दूँगा, वे निःसंदेह उसका पालन करेंगे।॥8॥
 
Father! When the truthful Videhraj Janaka comes to my hermitage, he will undoubtedly carry out whatever orders I give him. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)