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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 106: कालकवृक्षीय मुनिका विदेहराज तथा कोसलराजकुमारमें मेल कराना और विदेहराजका कोसलराजको अपना जामाता बना लेना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.106.7 
यस्त्वं प्रच्यावितो राज्याद् व्यसनं चोत्तमं गत:।
आनृशंस्येन वृत्तेन क्षत्रियेच्छसि जीवितुम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
राजकुमार! तुम्हें राज्य से निकाल दिया गया है। तुम पर घोर विपत्ति आई है, फिर भी तुमने क्रूरता नहीं अपनाई; तुम अपना जीवन करुणामयी आचरण से जीना चाहते हो। 7.
 
Prince! You have been expelled from the kingdom. You have fallen into a great calamity, yet you have not adopted cruelty; you want to live your life with compassionate behavior. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)