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mahabharat 12.106.4: ऋषि बोले- राजकुमार! तुम जैसा कहते हो, वैसे ही अच्छे हो। तुम गुणों से संपन्न हो। तुम धार्मिक स्वभाव के हो और अपनी बुद्धि से बहुत सी चीजों को देखने और समझने की शक्ति रखते हो।॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.106: कालकवृक्षीय मुनिका विदेहराज तथा कोसलराजकुमारमें मेल कराना और विदेहराजका कोसलराजको अपना जामाता बना लेना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 106: कालकवृक्षीय मुनिका विदेहराज तथा कोसलराजकुमारमें मेल कराना और विदेहराजका कोसलराजको अपना जामाता बना लेना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.106.4 
मुनिरुवाच
उपपन्नस्त्वमेतेन यथा क्षत्रिय भाषसे।
प्रकृत्या ह्युपपन्नोऽसि बुद्धॺा वा बहुदर्शन:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
ऋषि बोले- राजकुमार! तुम जैसा कहते हो, वैसे ही अच्छे हो। तुम गुणों से संपन्न हो। तुम धार्मिक स्वभाव के हो और अपनी बुद्धि से बहुत सी चीजों को देखने और समझने की शक्ति रखते हो।॥4॥
 
The sage said- Prince! You are as good as you say. You are endowed with virtues. You are of religious nature and have the power to see and understand many things through your intellect. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)