Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.106.28: तत्पश्चात् उसने अपनी पुत्री का विवाह उसके साथ कर दिया और उसे दहेज में नाना प्रकार के रत्न दिए। राजाओं का यही परम कर्तव्य है; जय-पराजय अनित्य है॥ 28॥ | mahabharat अध्याय 12.106: कालकवृक्षीय मुनिका विदेहराज तथा कोसलराजकुमारमें मेल कराना और विदेहराजका कोसलराजको अपना जामाता बना लेना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् उसने अपनी पुत्री का विवाह उसके साथ कर दिया और उसे दहेज में नाना प्रकार के रत्न दिए। राजाओं का यही परम कर्तव्य है; जय-पराजय अनित्य है॥ 28॥
Thereafter he married his daughter to him and presented him with various kinds of gems as dowry. This is the ultimate duty of kings; victory and defeat are temporary.॥ 28॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि कालकवृक्षीये षडधिकशततमोऽध्याय:॥ १०६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें कालकवृक्षीय मुनिका उपदेशविषयक एक सौ छठा अध्याय पूरा हआ॥ १०६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥