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mahabharat 12.106.26: हे राजन! आप मेरे द्वारा आदरपूर्वक मेरे घर पधारें। ऐसा कहकर वे दोनों एक दूसरे के प्रति आश्वस्त हो गए और ब्रह्मर्षि की पूजा करके अपने-अपने घर चले गए॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 12.106: कालकवृक्षीय मुनिका विदेहराज तथा कोसलराजकुमारमें मेल कराना और विदेहराजका कोसलराजको अपना जामाता बना लेना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 106: कालकवृक्षीय मुनिका विदेहराज तथा कोसलराजकुमारमें मेल कराना और विदेहराजका कोसलराजको अपना जामाता बना लेना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.106.26 
यथावत् पूजितो राजन् गृहं गन्तासि मे भृशम्।
तत: सम्पूज्य तौ विप्रं विश्वस्तौ जग्मतुर्गृहान्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! आप मेरे द्वारा आदरपूर्वक मेरे घर पधारें। ऐसा कहकर वे दोनों एक दूसरे के प्रति आश्वस्त हो गए और ब्रह्मर्षि की पूजा करके अपने-अपने घर चले गए॥ 26॥
 
"O King! Please come to my house with due respect and honour by me." Having said this, both of them became confident of each other, and after worshipping the Brahmarshi, proceeded towards their homes.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)