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mahabharat 12.106.20: जब ऋषि ने ऐसा कहा, तब राजा ने पूजनीय ब्राह्मण और महर्षि का पूजन और सम्मान किया तथा उनके वचनों का अनुमोदन करते हुए इस प्रकार उत्तर दिया।   |   mahabharat अध्याय 12.106: कालकवृक्षीय मुनिका विदेहराज तथा कोसलराजकुमारमें मेल कराना और विदेहराजका कोसलराजको अपना जामाता बना लेना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 106: कालकवृक्षीय मुनिका विदेहराज तथा कोसलराजकुमारमें मेल कराना और विदेहराजका कोसलराजको अपना जामाता बना लेना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.106.20 
इत्युक्त: प्रत्युवाचेदं वचनं ब्राह्मणर्षभम्।
प्रतिपूज्याभिसत्कृत्य पूजार्हमनुमान्य च॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जब ऋषि ने ऐसा कहा, तब राजा ने पूजनीय ब्राह्मण और महर्षि का पूजन और सम्मान किया तथा उनके वचनों का अनुमोदन करते हुए इस प्रकार उत्तर दिया।
 
When the sage said this, the king worshipped and honoured the revered Brahmin and Maharshika and approved of his words and replied thus.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)