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mahabharat 12.106.2: हे प्रभु! मैंने ये सब बुरी आदतें पहले ही त्याग दी हैं, जिससे किसी को मुझ पर संदेह न हो और सबका पूर्ण कल्याण हो जाए॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 12.106: कालकवृक्षीय मुनिका विदेहराज तथा कोसलराजकुमारमें मेल कराना और विदेहराजका कोसलराजको अपना जामाता बना लेना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 106: कालकवृक्षीय मुनिका विदेहराज तथा कोसलराजकुमारमें मेल कराना और विदेहराजका कोसलराजको अपना जामाता बना लेना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.106.2 
पुरस्तादेव भगवन् मयैतदपवर्जितम्।
येन मां नाभिशङ्केत येन कृत्स्नं हितं भवेत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! मैंने ये सब बुरी आदतें पहले ही त्याग दी हैं, जिससे किसी को मुझ पर संदेह न हो और सबका पूर्ण कल्याण हो जाए॥ 2॥
 
O Lord! I have already given up all these bad habits, so that no one doubts me and everyone is benefited completely.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)