Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.106.19: ‘बेटा! अपने में जय और पराजय दोनों को देखना चाहिए। जो लोग दूसरों का धन छीन लेते हैं और उनके पास कुछ भी नहीं छोड़ते, वे सब कुछ छीन लेने के पाप के कारण अपने लिए भी सदैव भयभीत रहते हैं।’॥19॥   |   mahabharat अध्याय 12.106: कालकवृक्षीय मुनिका विदेहराज तथा कोसलराजकुमारमें मेल कराना और विदेहराजका कोसलराजको अपना जामाता बना लेना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 106: कालकवृक्षीय मुनिका विदेहराज तथा कोसलराजकुमारमें मेल कराना और विदेहराजका कोसलराजको अपना जामाता बना लेना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.106.19 
आत्मन्यपि च संदृश्यावुभौ जयपराजयौ।
नि:शेषकारिणां तात नि:शेषकरणाद् भयम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
‘बेटा! अपने में जय और पराजय दोनों को देखना चाहिए। जो लोग दूसरों का धन छीन लेते हैं और उनके पास कुछ भी नहीं छोड़ते, वे सब कुछ छीन लेने के पाप के कारण अपने लिए भी सदैव भयभीत रहते हैं।’॥19॥
 
‘Son! One should see both victory and defeat in oneself. Those who snatch the wealth of others and leave nothing with them, they always fear for themselves also because of the sin of snatching everything.'॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)