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mahabharat 12.106.15: यदि वह अपने पूर्वजों के राज्य के लिए युद्ध में तुम्हें हराने की इच्छा से तुम्हारे साथ युद्ध आरम्भ करे, तो क्षत्रिय के लिए यह उसके अपने धर्म का पालन होगा॥15॥   |   mahabharat अध्याय 12.106: कालकवृक्षीय मुनिका विदेहराज तथा कोसलराजकुमारमें मेल कराना और विदेहराजका कोसलराजको अपना जामाता बना लेना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 106: कालकवृक्षीय मुनिका विदेहराज तथा कोसलराजकुमारमें मेल कराना और विदेहराजका कोसलराजको अपना जामाता बना लेना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.106.15 
यद्ययं प्रतियुद्धॺेत् त्वां स्वकर्मक्षत्रियस्य तत्।
जिगीषमाणस्त्वां युद्धे पितृपैतामहे पदे॥ १५॥
 
 
अनुवाद
यदि वह अपने पूर्वजों के राज्य के लिए युद्ध में तुम्हें हराने की इच्छा से तुम्हारे साथ युद्ध आरम्भ करे, तो क्षत्रिय के लिए यह उसके अपने धर्म का पालन होगा॥15॥
 
'If he starts a war with you with the desire to defeat you in the battle for the kingdom of his forefathers, then for a Kshatriya it would be the observance of his own dharma.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)