Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.106.10: उसका हृदय दर्पण के समान निर्मल और शरद् के चन्द्रमा के समान उज्ज्वल है। मैंने उसे सब प्रकार से परख लिया है। मुझे उसमें कोई पाप या दोष नहीं दिखाई देता॥10॥ | mahabharat अध्याय 12.106: कालकवृक्षीय मुनिका विदेहराज तथा कोसलराजकुमारमें मेल कराना और विदेहराजका कोसलराजको अपना जामाता बना लेना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उसका हृदय दर्पण के समान निर्मल और शरद् के चन्द्रमा के समान उज्ज्वल है। मैंने उसे सब प्रकार से परख लिया है। मुझे उसमें कोई पाप या दोष नहीं दिखाई देता॥10॥
‘His heart is as pure as a mirror and as bright as the autumn moon. I have tested him in every way. I do not see any sin or fault in him.॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥