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राजोवाच
न निकृत्या न दम्भेन ब्रह्मन्निच्छामि जीवितुम्।
नाधर्मयुक्तानिच्छेयमर्थान् सुमहतोऽप्यहम्॥ १॥
अनुवाद
राजा ने कहा, "ब्राह्मण! मैं छल-कपट और अहंकार का सहारा लेकर जीवनयापन नहीं करना चाहता। यदि अधर्म से मुझे बहुत-सा धन भी मिल जाए, तो भी मैं उसकी इच्छा नहीं करता।"
The king said, "Brahmin! I do not wish to live by resorting to deceit and arrogance. Even if I get a lot of wealth by the help of unrighteousness, I do not desire it." 1.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥