Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.105.23-24: इससे तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होगी। तत्पश्चात् तुम राजा को किसी दुःखी महात्मा की व्यथा और किसी योगधर्म के ज्ञाता पुण्यात्मा पुरुष की कीर्ति सुनाओ, जिससे शत्रु राजा राज्य त्यागने की इच्छा करे। यदि सम्भवतः वह स्वभाव में ही रहे और त्याग से प्रभावित न हो, तो उसके द्वारा नियुक्त पुरुषों द्वारा समस्त शत्रुओं का नाश करने वाली सिद्ध औषधि का प्रयोग करके शत्रु के हाथी, घोड़े और मनुष्यों को मार डालना चाहिए। 23-24॥ | mahabharat अध्याय 12.105: कालकवृक्षीय मुनिके द्वारा गये हुए राज्यकी प्राप्तिके लिये विभिन्न उपायोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इससे तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होगी। तत्पश्चात् तुम राजा को किसी दुःखी महात्मा की व्यथा और किसी योगधर्म के ज्ञाता पुण्यात्मा पुरुष की कीर्ति सुनाओ, जिससे शत्रु राजा राज्य त्यागने की इच्छा करे। यदि सम्भवतः वह स्वभाव में ही रहे और त्याग से प्रभावित न हो, तो उसके द्वारा नियुक्त पुरुषों द्वारा समस्त शत्रुओं का नाश करने वाली सिद्ध औषधि का प्रयोग करके शत्रु के हाथी, घोड़े और मनुष्यों को मार डालना चाहिए। 23-24॥
This will fulfill your wish. Thereafter, you should narrate to the king the plight of some great man who is suffering and the glory of some virtuous man who is knowledgeable in Yogadharma, so that the enemy king may wish to give up his kingdom. If perhaps he remains in nature and is not affected by renunciation, then the enemy's elephants, horses and humans should be killed by using the medicine proven to destroy all enemies by the men appointed by him. 23-24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥