Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.105.15: बुद्धिमानों के विश्वास का पात्र बनकर तुम्हें अपने परम शत्रु के राज्य में सुखपूर्वक विचरण करना चाहिए तथा कुत्ते, मृग और कौए के समान सतर्क रहकर व्यर्थ आचरण करके विदेहराज के प्रति मित्रता का कर्तव्य निभाना चाहिए। | mahabharat अध्याय 12.105: कालकवृक्षीय मुनिके द्वारा गये हुए राज्यकी प्राप्तिके लिये विभिन्न उपायोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बुद्धिमानों के विश्वास का पात्र बनकर तुम्हें अपने परम शत्रु के राज्य में सुखपूर्वक विचरण करना चाहिए तथा कुत्ते, मृग और कौए के समान सतर्क रहकर व्यर्थ आचरण करके विदेहराज के प्रति मित्रता का कर्तव्य निभाना चाहिए।
Having become the object of trust of the wise, you should roam happily in the kingdom of your greatest enemy, and by remaining alert like a dog, a deer, and a crow, you should perform the duty of friendship towards the King of Videha by engaging in meaningless behavior.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥