Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.104.9: मेरी दृष्टि में जो लोग अपना विशाल धन त्याग देते हैं, वे बहुत कठिन कार्य करते हैं। मेरे पास अब धन के नाम पर कुछ भी नहीं है, फिर भी मैं उसकी आसक्ति नहीं छोड़ पा रहा हूँ॥9॥ | mahabharat अध्याय 12.104: राज्य, खजाना और सेना आदिसे वंचित हुए असहाय क्षेमदर्शी राजाके प्रति कालकवृक्षीय मुनिका वैराग्यपूर्ण उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मेरी दृष्टि में जो लोग अपना विशाल धन त्याग देते हैं, वे बहुत कठिन कार्य करते हैं। मेरे पास अब धन के नाम पर कुछ भी नहीं है, फिर भी मैं उसकी आसक्ति नहीं छोड़ पा रहा हूँ॥9॥
In my opinion, those who give up their vast wealth are doing very difficult things. I have nothing in the name of wealth now, yet I am unable to give up my attachment to it.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥