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mahabharat 12.104.6: आप जैसे धार्मिक और कृतज्ञ संत ही मानसिक या शारीरिक रोग से पीड़ित व्यक्ति को आश्रय प्रदान कर सकते हैं ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.104: राज्य, खजाना और सेना आदिसे वंचित हुए असहाय क्षेमदर्शी राजाके प्रति कालकवृक्षीय मुनिका वैराग्यपूर्ण उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 104: राज्य, खजाना और सेना आदिसे वंचित हुए असहाय क्षेमदर्शी राजाके प्रति कालकवृक्षीय मुनिका वैराग्यपूर्ण उपदेश  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.104.6 
व्याधिना चाभिपन्नस्य मानसेनेतरेण वा।
धर्मज्ञश्च कृतज्ञश्च त्वद्विध: शरणं भवेत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
आप जैसे धार्मिक और कृतज्ञ संत ही मानसिक या शारीरिक रोग से पीड़ित व्यक्ति को आश्रय प्रदान कर सकते हैं ॥6॥
 
Only a religious and grateful saint like you can provide shelter to a person who is suffering from a mental or physical illness. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)