Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.104.52: तुम्हारे जैसे विद्वान् पुरुष का उचित कार्य यही है कि तुम ईशा के समान बड़े-बड़े दाँतों वाले जंगली हाथी के साथ अकेले वन में विचरण करो और वन के पत्ते, फूल, फल और मूल खाकर संतुष्ट रहो ॥ 52॥ | mahabharat अध्याय 12.104: राज्य, खजाना और सेना आदिसे वंचित हुए असहाय क्षेमदर्शी राजाके प्रति कालकवृक्षीय मुनिका वैराग्यपूर्ण उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तुम्हारे जैसे विद्वान् पुरुष का उचित कार्य यही है कि तुम ईशा के समान बड़े-बड़े दाँतों वाले जंगली हाथी के साथ अकेले वन में विचरण करो और वन के पत्ते, फूल, फल और मूल खाकर संतुष्ट रहो ॥ 52॥
The appropriate work for a learned person like you is to roam alone in the forest with a wild elephant having large tusks like that of Isha and to remain content by eating leaves, flowers, fruits and roots of the forest. ॥ 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥