Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.104.51: तुम्हें विशाल वन में अकेले ही घूमना चाहिए, कंद-मूल और फल खाकर रहना चाहिए। अपनी वाणी, मन और इन्द्रियों को वश में रखना चाहिए तथा सभी प्राणियों पर दया करनी चाहिए। ॥ 51॥ | mahabharat अध्याय 12.104: राज्य, खजाना और सेना आदिसे वंचित हुए असहाय क्षेमदर्शी राजाके प्रति कालकवृक्षीय मुनिका वैराग्यपूर्ण उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तुम्हें विशाल वन में अकेले ही घूमना चाहिए, कंद-मूल और फल खाकर रहना चाहिए। अपनी वाणी, मन और इन्द्रियों को वश में रखना चाहिए तथा सभी प्राणियों पर दया करनी चाहिए। ॥ 51॥
You should roam alone in the vast forest, living on roots and fruits. Control your speech, mind and senses and maintain compassion towards all creatures. ॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥