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mahabharat 12.104.50: जो लोग हाथ में खोपड़ी लेकर भीख मांगते हैं, अथवा जो क्रूर मनुष्य हैं, जो अत्यन्त पापमय, अनेक दोषों से युक्त तथा कायरों के ही योग्य हैं, उनके छलपूर्ण आचरण की तुझे इच्छा नहीं करनी चाहिए। ॥50॥   |   mahabharat अध्याय 12.104: राज्य, खजाना और सेना आदिसे वंचित हुए असहाय क्षेमदर्शी राजाके प्रति कालकवृक्षीय मुनिका वैराग्यपूर्ण उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.104.50 
न त्वेव जाल्मीं कापालीं वृत्तिमेषितुमर्हसि।
नृशंसवृत्तिं पापिष्ठां दुष्टां कापुरुषोचिताम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
जो लोग हाथ में खोपड़ी लेकर भीख मांगते हैं, अथवा जो क्रूर मनुष्य हैं, जो अत्यन्त पापमय, अनेक दोषों से युक्त तथा कायरों के ही योग्य हैं, उनके छलपूर्ण आचरण की तुझे इच्छा नहीं करनी चाहिए। ॥50॥
 
You should not desire the deceitful behaviour of those who beg with a skull in their hands, or of cruel men, which is extremely sinful, tainted with many faults and fit only for cowards. ॥ 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)