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mahabharat 12.104.5: हे महामुनि! आत्महत्या, दरिद्रता, दूसरों की शरण तथा ऐसे अन्य नीच कर्मों के अतिरिक्त यदि कोई अन्य उपाय हो तो कृपया मुझे बताइए।॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.104: राज्य, खजाना और सेना आदिसे वंचित हुए असहाय क्षेमदर्शी राजाके प्रति कालकवृक्षीय मुनिका वैराग्यपूर्ण उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.104.5 
अन्यत्र मरणाद् दैन्यादन्यत्र परसंश्रयात्।
क्षुद्रादन्यत्र चाचारात् तन्ममाचक्ष्व सत्तम॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे महामुनि! आत्महत्या, दरिद्रता, दूसरों की शरण तथा ऐसे अन्य नीच कर्मों के अतिरिक्त यदि कोई अन्य उपाय हो तो कृपया मुझे बताइए।॥5॥
 
O great saint! If there is any other way than committing suicide, showing poverty, seeking refuge under others and doing other such vile deeds, please tell me that. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)